• navinya posted an activity 12 hours, 46 minutes ago

  • कुदरत का भी अजब दस्तूर है !
    जिससे तमन्ना थी बेइंतेहा,रूबरू होने की,
    वही सनम हमसे खफा और बहुत दूर है,
    मिन्नतें की खुदा से उसे पाने की,अपनी शरीक-ए-हयात बनाने की,
    वही अपनों को छोड़ किसी गैर संग मसरूर है,
    कुदरत का भी अजब दस्तूर है !!
    जिसे चाहा बेतहाशा,उसी पर छाया किसी और की हसरत का फ़ितूर है,
    हमने की सच्ची वफा,जो उसे हर दफा हुई नामंज़ूर है,
    अश्क बहाए ह…[Read more]

  • srk choudhary posted an activity 2 days, 8 hours ago

    waqt ka taqaaza hai
    zra saa jaan lo
    siffa mangnai vaalo
    magfirat bhi yahi manglo

  • srk choudhary posted an activity 2 days, 9 hours ago

    thai deewane kabhi zindgi kai
    jb tak foat se muntazeer na huyee
    aur jb foat se huye rubaroou
    fitrato se aasihqi hi khtam ho gaii

    waqt ki kimat ko smjo

  • vividh jay choubisa posted an activity 1 week ago

    आज फिर उससे मैं
    मात खा गया
    हार के भी फिर जीत की
    सौगात पा गया
    चिढ़ाया जब नन्हे हाथों ने
    हार पर मेरी मुझको
    बाप होने का फिर वो हसी
    जस्बात पा गया

    *विविध जय*

  • हिस्सें की उसके पूरी हर इबादत हो गई
    हाँ सरहद पे फिर आज एक शहादत हो गई
    मांग कर सबूत शाहदतें झुठलाने वालों
    देखो न एक और माँ फिर आज भारत हो गई

    *विविध जय चौबीसा*

  • Girish Ram Aryah posted an activity 2 weeks ago

    ज़ख्म है अभी नासूर बनने दो इसे,
    बर्फ़ हो गया है ख़ून थोड़ा जलने दो इसे,
    न जाने कब जाकर लौ पकड़े,
    अभी वक़्त है ज़रा सम्भलने दो इसे।
    कभी न कभी ठोकरों से बचेगा ही,
    ज़रा कुछ दूर अकेले चलने दो इसे!
    बेहया है दिल किसी भी नादां पर आ जाता है,
    मासूम है ‘गिरी’ जरा फिसलने दो इसे !

  • तू ही है आरज़ू,तू ही है मेरी जुस्तजू !
    हम दोनों के दरमियाँ है साँसों की अनकही गुफ़्तगू !!

  • नज़र मिलाना ठीक नही
    दिल लगाना ठीक नही

    नैन लड़ा के नैनन से
    नज़र चुराना ठीक नही…

    दिल की दिल मे रखना
    राज़ छुपाना ठीक नही…

    अब हाँ कहो या ना कहो
    यूँ तड़पाना ठीक नही….

    रवि कुमार

  • Anisha Gupta posted an activity 2 weeks, 4 days ago

    I miss you
    The way I feel with you, can’t be with someone else
    When we are together we always fight,
    But those little acts of annoyance are the one that fill my heart with delight
    Perhaps we are not meant to be one,
    But strength will always remain in our connection
    U hurt me at various occasions,
    Still my heart aches for you like a stupid idiot…[Read more]

  • Varsha Nehra posted an activity 2 weeks, 6 days ago

    I wonder if I knew French,
    Would you have understood me?

    I wonder if I knew German,
    Would you be satisfied by my decisions?

    I wonder if I knew Japanese,
    Would you have understood my love?

    I wonder if I knew Latin,
    Would it matter if I knew Sanskrit too?

    I wonder if I knew Korean,
    Would I be called a better person?

    I wonder if I knew…[Read more]

  • seervi prakash panwar posted an activity 3 weeks ago

    तन्हाईयो के घेरे में कोई उझाला दिखाता तो कोई अंधियारा दिखाता,
    सर्दियों के इन रातो में कोई धूप दिखाता तो कोई बर्फ दिखाता,
    हर पल दिखता यह दोगलापन थोड़ा सा चिन्तनमय जरूर है,
    मैं मुशफिर हूँ जिंदगी का फिर भी मुझे यहाँ हर कोई छाव दिखता।
    –सीरवी प्रकाश पंवार

  • Shweta Pandey posted an activity 3 weeks, 2 days ago

    सघन धूप है पीड़ाओं की
    खुशियों का गोमुख नही है
    जीवन है एक वैतरणी नदी
    सूर्य की अग्नि सा तपता
    यह गंगा सा शीतल नही है
    किसी पुरवाई को तलाशते ये नैन
    सपनों पर कुठाराघात करते
    ये यथार्थ के भँवर
    तुम डूब रहे हो क्या
    नियति के तुम प्रणेता नही हो
    मानव तुम दिव्य शक्ति हो
    अभी समर्थ के पंखों को
    बिखरने मत दो
    सूर्य चन्द्र का समय निर्धारित है
    तुम अपने समय का मान…[Read more]

  • Cherry Panwala posted an activity 3 weeks, 5 days ago

    Humari tanhaiyo se guzarke kaha jaayega
    A wakt
    Tu kahi jaake mehfil sajaayega
    Kabhi is taraf bhi karle rukh
    Mehfilo ka
    Pal do pal hum bhi muskura le to Tera
    Kya jaayega

  • Sachin Sharma posted an activity 3 weeks, 6 days ago

    Na jane kya aaj ek lamha mujhse aakar keh gya,
    Lekar mere dil ko wo kahi aur jakar theher gya, Dhadkane meri ab kisi aur dil k liay dhadakne lagi hai,
    Keh kar itna mujhe jine ki wo ek nayi vajah de gya,
    Zindagi thi meri berang unme khushi k rang bhar gya,
    Ankho mein Jo kabhi aansu the unme ek nayi chamak bhar gya,
    Poochne laga main jab us lamhe…[Read more]

  • Shweta Pandey posted an activity 3 weeks, 6 days ago

    कितना उज्ज्वल शीतल निर्मल
    दर्पण सा मन
    तेरे कर्मो का प्रतिबिम्ब
    निर्णय जिसका सार्वभौमिक
    तेरी चेतना का आवास
    प्रतिपल तेरे सही गलत को चुनौती देता
    परम शक्ति का आधार
    निर्गुण सगुण की सीमाओं से परें
    चिंतन का एकमात्र साधन
    प्रेम का अविरल गोमुख
    अनुभूति का वैश्विक स्वरूप
    हजार स्मृतियाँ सजोयें
    बसन्त और पतझड़ की
    तेरा एकमात्र सखा
    तिमिर या उज्ज्वल पथ पर
    शब्द…[Read more]

  • Shweta Pandey posted an activity 3 weeks, 6 days ago

    कितना उज्ज्वल शीतल निर्मल
    दर्पण सा मन
    तेरे कर्मो का प्रतिबिम्ब
    निर्णय जिसका सार्वभौमिक
    तेरी चेतना का आवास
    प्रतिपल तेरे सही गलत को चुनौती देता
    परम शक्ति का आधार
    निर्गुण सगुण की सीमाओं से परें
    चिंतन का एकमात्र साधन
    प्रेम का अविरल गोमुख
    अनुभूति का वैश्विक स्वरूप
    हजार स्मृतियाँ सजोयें
    बसन्त और पतझड़ की
    तेरा एकमात्र सखा
    तिमिर या उज्ज्वल पथ पर
    शब्द…[Read more]

  • Shweta Pandey posted an activity 4 weeks, 1 day ago

    प्रीत की रीति नही है कोई
    स्वप्न सरीखा दृश्य न कोई
    मन की गति सा प्रबल न कोई
    नैनों सा दर्पण नही कोई
    सौन्दर्य की उपमा नही कोई
    मातृ शक्ति सा ईश न कोई
    पितृ शक्ति सा देव न कोई
    नव दिन सी आशा नही कोई
    रात्रि सा आश्रय नही कोई
    मित्र समान सुख नही कोई
    निन्दक जैसा सुधारक नही कोई
    भुख समान धर्म न कोई
    क्रिया समक्ष प्रतिक्रिया नही कोई
    कवि बिना कविता नही कोई
    मानव ब…[Read more]

  • VIJAY KUMAR KHEMKA posted an activity 1 month ago

    वक़्त के खेल में,
    हम खिलाड़ी भी थे
    और खिलौना भी,

    वो क्या है ना कि,
    ज़िन्दगी हमसे खेलती रही
    और हम
    अल्फाज़ो से।

    -विजय खेमका

  • Shweta Pandey posted an activity 1 month, 1 week ago

    तुम असिमित विस्तार हो मेरे स्वप्नों का
    अधूरी आकांक्षाएं लिये मेरे बोझिल नैन
    किसी निशब्द रात्रि के साथ
    तुम्हारे स्वप्नों के प्रांगण में उतरकर
    कोई पूर्ण होते ख्वाब को देखकर ठहर गये हो

    श्वेत चाँदनी सी जो तुम्हारी पैरों की नूपुर
    मेरे मन के आँगन में एक मधुर स्वर की झंकार करते
    मेरे प्रेम को पल्लवित करती
    और मैं अलसायी आँखों को मूंदकर
    अपने अनकहे शब्दों…[Read more]

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