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  • उल्फ़त की साँझ हैं मेरी, मै गीत मीत के सुनाऊँगा!
    जज्बातों की आवाज हैं मेरी, मै रीत अपनों की अपनाऊंगा!
    वो हैं ज़िंदा मुझमे, एक अटूट भरोसा जो हैं उससे!
    जो पल भर में टूट जाए भरोसा, ऐसा कदम न बढ़ाऊँगा!!
    –सीरवी प्रकाश पंवार

  • Kumar ravi hind posted an activity 1 week ago

    अंतिम साथी, सच्ची साथी
    निश्चित है एक रोज मिलेगी
    कब मिलेगी ,कँहा मिलेगी
    ज्ञात नहीं….
    मुझे अपना बनाने,
    साथ ले जाने,
    ज़रूर आएगी।
    जग के झूठे बन्धन से छुड़वाकर
    प्रेम हाला मुझको पिलाकर
    मुझे साथ ले जाने,
    अंतिम साथी,
    सच्ची साथी आएगी
    किन्तु कब ,कँहा, कैसे?
    ज्ञात नही……
    ज्ञात नही…..

    रवि कुमार

  • Kumar ravi hind posted an activity 1 week, 3 days ago

    इ\’क\’कार को इ\’न\’कार करना था!
    अब जाना मुझे \’न\’ प्यार करना था!!
    पर दिल भला कब किसकी सुनता है,
    उसे तो बस प्यार, प्यार,प्यार करना था!!
    कुमार रवि हिन्द

  • मोहबत की इन रंगीन तस्वीरो में देखो,ऐतबार नज़र आएगा!
    इन तस्वीरों से धुल हटा कर देखो, एक अहसास नज़र आएगा!
    जज्बातो की हैं मेरी यह कहानी, कोई क्या तोड़े पल भर में,
    पल मेरी परछाई को घूर कर देखो, मेरा यार नज़र आएगा!!
    –सीरवी प्रकाश पंवार

  • यही सब बोल रहे थे कल, जादू हैं तेरी हाथों में!
    आख़िर उठा हूँ मै इसी से,जो टुटा था यादों में!
    कलम मेरी, कागज मेरा, इतिहास भी होगा!
    आख़िर बहूत कुछ छुपा हैं, उनकी ही हरकतों में!!
    –सीरवी प्रकाश पंवार

  • अब तो हद हो गयी ज़माने की।
    जीते जी मौत के इस ज़नाज़े
    में इतने अपने हैं
    की एक शब्द भी निकल जाए गलती से,
    तो खुद को ही लगता हैं
    –सीरवी प्रकाश पंवार

  • सुनो ऐ इश्क़ वालों, मै तुम्हारा एक अख़बार लिखने आया हूँ!
    जो छोड़ दिया तुमने अपनों को, मै वो एक रूप गढ़ने आया हूँ!
    आखिर सब कुछ भूल कर नयी दुनिया बनाने वालों!
    मुसाफ़िर हूँ कलम का, मै फिर तुम्हारा इतिहास रचने आया हूँ!!
    –सीरवी प्रकाश पंवार

  • Pulkit Prabhav posted an activity 3 weeks, 3 days ago

    Dil ke jakhm siskiyon me rone se kahan bharte hain!
    Aankhe jo pathra gayi unme sapne kahan thahrte hain!!
    Eshq-visq, pyaar-mohabbat,,kayamat ebaadat ye sab to bahane hain!
    Jo chale jate hain vo laut kr kahan aate hain!!

  • Sachin A. Pandey posted an activity 4 weeks ago

    अब तुम जो हो, तभी नूर-ए-वफा की बात कहते हैं !
    तुम्हारे लबों से बायाँ हुए हर लब्ज पर इरशाद कहते हैं !!
    इस हरफ़नमौला को कहाँ फिक्र इस जमाने की ?
    हम तो तुम्हें ही मुकद्दर, तुम्ही को हयात-ए-मुराद कहते हैं !!

  • Shweta Pandey posted an activity 4 weeks, 1 day ago

    पत्रकार की जिंदगी
    एक खबर की तरह
    खोजना भागना छानबीन
    खोजना खबर को दिन रात
    कंप्यूटर की स्क्रीन पर
    भागना नेता के पीछे
    एक बाइट की तलाश में
    छानबीन खबर की
    उसकी सत्यता उसके तथ्य
    आसा नहीं हैं पत्रकार हो जाना
    हाथ में माइक आईडी लिए लुभावना किरदार
    कैमरे के सामने खड़ा
    राजनीति,सामाजिक ,आर्थिक पहलू
    पर बोलने के लिए सदैव अड़ा
    रूबरू कराये समाज की…[Read more]

  • seervi prakash panwar posted an activity 1 month ago

    कोई ख़ामोश हैं मेरी चौखट पर मग़र..आना जाना काफ़ी हैं!
    कोई घूर रहा हैं नम आँखों से मगर..बात गहरी काफ़ी हैं!
    आख़िर जी कर भी मरना तो आसां नही ..फिर भी जी रहा हूँ!
    मै झूम रहा था उसकी आहट में मग़र…वो परेशान काफ़ी हैं!!
    –सीरवी प्रकाश पंवार

  • Sachin A. Pandey posted an activity 1 month ago

    हम कब के तुम्हारे हो जाते सनम अगर ज़िंदगी में कोई दस्तूर न होता,
    दिल तक दस्तक जरूर दे पाते अगर तेरे दिल का पता इतना दूर न होता;
    कोई हमें बावला न कहता अगर हम पर तेरे इश्क़ का सुरूर न होता,
    हम इस मोहब्बत-ए-कैद से कब के रिहा हो जाते अगर तुझसे दिल लगाने का कसूर न होता।

  • seervi prakash panwar posted an activity 1 month ago

    यह अंधड़ सी क्यों चल रही,
    दीप जलने क्यों नहीं दे रही,
    क्यों यह सुना-सुना आंगन,
    फुलजड़ी जलने नहीं दे रहा,
    आखिर क्यों वो टेढ़ी-मेढ़ी,
    अपना रास नहीं आ रही,
    माँ…..
    अब तू क्यों जवाब नहीं दे रहीं..
    मुझे पता है पापा नहीं आ रहें,
    पर माँ आज का अखबार बोल रहा,
    वो हजारों पटाखे फोड़ रहें,
    माँ……
    मत रो माँ भीग रहा है आंगन,
    कहा जलाऊ मैं फुलजड़ी.…[Read more]

  • Shweta Pandey posted an activity 1 month ago

    >
    > दहलीज मेरी ही क्यों
    > मर्यादित जीवन का पर्याय क्या मैं हूँ
    > ए पुरुष क्या स्वतंत्रता पर तेरा ही एकाधिकार है
    > स्वतंत्रता किसी नारी के उत्पीड़न की
    > उसके शारीरिक की
    > क्या नारी का शरीर तेरा रोजगार है
    > प्रताड़ना भी वह सहे
    > पीड़ा का दंश भी
    > तेरी वासना को कोख में संभाले
    > समाज के लांछन चरित्र पर उसके
    > नारी माँस का टुक…[Read more]

  • Kumar ravi hind posted an activity 1 month ago

    इस बात को तुम पत्थर की लकीर समझ लो
    कड़ी मेहनत से बनती है तकदीर समझ लो।।

    कुमार रवि

  • Kumar ravi hind posted an activity 1 month ago

    टन टना टन
    टन टन तारा
    जाना है क्या?
    पुलिस थाणा,
    खड़ा खड़ा तू
    छेड़ रहा है
    चल हो तू
    9,2,11

    कुमार रवि

  • Sachin A. Pandey posted an activity 1 month ago

    तू ही है मौला,तू ही खुदा;कहाँ हुआ तू यों गुमशुदा।
    नैन देखे न दिखे तेरी सूरत,नूर और सादगी की है तू एक मूरत।।
    तू मिला तो रब मिला,जिंदगी ठहरी मुश्किलात-ए-सिलसिला।
    तू है तो हूँ मैं काबिल।तू न हो तो नहीं कुछ हासिल।।

    – सचिन अ॰ पाण्डेय

  • घर पधारी सुनहरी परी
    बरखा-सी इठलाती,
    लोगों को हर्षाती;
    सौम्यता भरी कलियों-सी,
    घर पधारी सुनहरी परी|

    माँ-बाप की यों दुलारी,
    जीवन से ज्यादा प्यारी;
    अंतर में सभी के बसती,
    खुशियों का गीत रचती;
    घर पधारी सुनहरी परी|

    पढ़-लिखकर हुई सुशोभित,
    ज्ञानसन्दूक किए अर्जित;
    शिक्षा का पाठ पढ़ाती,
    घर पधारी सुनहरी परी|

    संघर्ष-भरे क्षण को भी,
    मौ…[Read more]

  • अदाएं हैं कातिल,जुल्फ है नशीली,
    हुस्न है नमकीन,आँखें हों कोई अनसुलझी पहेली,
    तेरे बगैर हुई यह जिंदगी अधूरी,
    इस मरीज-ए-इश्क को तू ही एक दवा जरूरी।

  • Rizwan Riz posted an activity 1 month, 1 week ago

    बीस दिन

    बीस दिन हो गए, उससे बात किए हुए
    बीस दिन बाक़ी हैं शायद, इस ज़िंदगी के लिए।

    बीस दिन से लफ्ज़ भी, मेरे कुछ ख़ामोश हैं
    बीस दिन से मानो जैसे, हम भी कुछ मदहोश है।

    बीस दिन से दिल को, कुछ न अच्छा लगता है
    बीस दिन से कोई भी, शख़्स न सच्चा लगता है।

    बीस दिन से आँखों में, कुछ नमी-नमी-सी रहती हैं
    सब है मेरे पास में फिर भी, कमी-कमी-सी रहती है।…[Read more]

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