पोएम्स बकेट

आज की उत्तम पंक्तियाँ

  • कोई ज़रा मुझे ये बता दे,
    मंदिर और मज़्ज़िद की हवा अलग है क्या ?
    ©नीवो

  • यह कैसा कानून!
    जहाँ ‘ज़ुल्म’ बेखौफ हर सीमा लाँघ रहा,
    और ‘इंसाफ’ सड़कों पर भीख माँग रहा !!
    ©नीवो

  • कोई न आया ठहर जाने के लिए…
    ये दिन, महीने, साल भी आए
    गुज़र जाने के लिए…
    ©नीवो

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Yuhi Phir Ek Saal Ho Gya - Motivational Hindi Ghazal
गज़ल
NiVo (Nitin Verma)

फिर एक साल हो गया

महज़ कुछ तारीख़े बीत जाने से कैसे मलाल हो गया,
पूरा करने की है चाहत तो अधूरा कैसे ख्याल हो गया !!

पूरी गज़ल के लिए क्लिक करे!

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मन मुताबिक शायरियाँ

विशेष लेखक

  • “अश्क आंखों से छलक गया,
    दे दो पनाह मुसाफ़िर को, किसी धाम की तरह !!
    देखो ज़रा ! सूरज भी ढल गया,
    आ जाओ तुम मिलने, फिर उस शाम की तरह !!”

  • “तेरी हुस्न-ए-तारीफ़
    जो हम किया करते है ,
    तेरी सूरत पर नहीं,
    तेरी सीरत पर किया करते है…”

बधाईयाँ संग्रह

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इश्क़. मोहब्बत. इबादत

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