ठहर जा कुछ पल ए-ज़िन्दगी

Theher Ja Kuch Pal E-zindagi - Sad Life Shayari Kavita

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ठहर जा, कुछ पल ए-ज़िन्दगी,
क्यों, इतनी तेजी से गुज़र रही है !!
लम्हा-लम्हा, हर घड़ी,
बीती यादों में, बदल रही है !!

ठहर जा, कुछ पल ए-ज़िन्दगी,
क्यों, इतनी तेजी से गुज़र रही है !!

कितनी प्यारी यादें, सँजोए बैठा है ये दिल !!
वक़्त के मिले गमों को, छुपाए बैठा है ये दिल !!

बिछड़ गए, जो अपने हमसे
आज उन सबकी, याद आ रही है !!

ठहर जा, कुछ पल ए-ज़िन्दगी,
क्यों, इतनी तेजी से गुज़र रही है !!
लम्हा-लम्हा, हर घड़ी,
बीती यादों में, बदल रही है !!

ठहर जा, कुछ पल ए-ज़िन्दगी,
क्यों, इतनी तेजी से गुज़र रही है !!

कितने ही नए रिश्ते बने, कितने ही रिश्ते टूट गए !!
कितने ही जो चाहने वाले, बीच सड़क में छूट गए !!

एक-एक करके, ए-ख़ुदा,
हम सबकी, बारी आ रही है !!

ठहर जा, कुछ पल ए-ज़िन्दगी,
क्यों, इतनी तेजी से गुज़र रही है !!
लम्हा लम्हा, हर घड़ी,
बीती यादों में, बदल रही है !!

ठहर जा, कुछ पल ए-ज़िन्दगी,
क्यों, इतनी तेजी से गुज़र रही है !!

आने वाला कल, ना जाने कैसा होगा,
कौन कौन अपना, पास होगा,
कौन पास होकर भी दूर होगा !!

“अलग” आजकल के रिश्तों में,
क्यों इतनी गिरावट आ रही है !!

ठहर जा, कुछ पल ए-ज़िन्दगी,
क्यों, इतनी तेजी से गुज़र रही है !!
लम्हा लम्हा, हर घड़ी,
बीती यादों में, बदल रही है !!

ठहर जा, कुछ पल ए-ज़िन्दगी,
क्यों, इतनी तेजी से गुज़र रही है !!
©सुखबीर सिंह ‘अलग’

Theher Ja Kuch Pal E-zindagi - Sad Life Shayari Kavita

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Theher Ja, Kuch Pal E-zindagi,
Kyon, Itni Teji Se Guzar Rahi Hai !!
Lamha Lamha, Har Ghadi,
Beeti Yaado’n Mein, Badal Rahi Hai !!

Theher Ja, Kuch Pal E-zindagi,
Kyon, Itni Teji Se Guzar Rahi Hai !!

Kitni Pyaari Yaadein, Sanjoye Baitha Hai Ye Dil,
Waqt Ke Mile Gamo Ko, Chupaaye Baitha Hai Ye Dil !!

Bichad Gaye, Jo Apne Hamse,
Aaj Un Sabki, Yaad Aa Rahi Hai !!

Theher Ja, Kuch Pal E-zindagi,
Kyon, Itni Teji Se Guzar Rahi Hai !!
Lamha-lamha, Har Ghadi,
Beethi Yaado’n Mein, Badal Rahi Hai !!

Theher Ja, Kuch Pal E-zindagi,
Kyon, Itni Teji Se Guzar Rahi Hai !!

Kitne Hi Naye Rishte Bane, Kitne Hi Rishte Toot Gaye !!
Kitne Hi Jo Chahne Wale, Beech Sadk Mein Choot Gaye !!

Ek-ek Karke, E-khuda,
Ham Sabki, Baari Aa Rhi Hai !!

Theher Ja, Kuch Pal E-zindagi,
Kyon, Itni Teji Se Guzar Rahi Hai !!
Lamha-lamha, Har Ghadi,
Beethi Yaado’n Mein, Badal Rahi Hai !!

Theher Ja, Kuch Pal E-zindagi,
Kyon, Itni Teji Se Guzar Rahi Hai !!

Aane Wala Kal, Naa Jaane Kaisa Hoga,
Kaun Kaun Apna, Paas Hoga,
Kaun Paas Hokar Bhi Door Hoga !!

“Alag” Aajkal Ke Rishton Mein,
Kyon Itni Girawat Aa Rhi Hai !!

Theher Ja, Kuch Pal E-zindagi,
Kyon, Itni Teji Se Guzar Rahi Hai !!
Lamha-lamha, Har Ghadi,
Beethi Yaado’n Mein, Badal Rahi Hai !!

Theher Ja, Kuch Pal E-zindagi,
Kyon, Itni Teji Se Guzar Rahi Hai !!
©Sukhbir Singh ‘Alag’

Sukhbir Singh Alagh
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