पोएम्स बकेट

आज की उत्तम पंक्तियाँ

  • तराश रहा वो इसी आस में,
    काश! ये महीने भर का निवाला होगा !!
    जलेगी लौं जब माटी के दीपक में,
    घर किसी और के भी उजाला होगा !!
    ©नीवो

  • दुआ मांग रहा देख कर उसे,
    जो तारा अम्बर से टूट रहा !!
    वाकिफ न है वो हकीकत से,
    साथ उसका भी किसी से छूट रहा !!
    ©नीवो

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मन मुताबिक शायरियाँ

विशेष लेखक

  • “अश्क आंखों से छलक गया,
    दे दो पनाह मुसाफ़िर को, किसी धाम की तरह !!
    देखो ज़रा ! सूरज भी ढल गया,
    आ जाओ तुम मिलने, फिर उस शाम की तरह !!”

  • “तेरी हुस्न-ए-तारीफ़
    जो हम किया करते है ,
    तेरी सूरत पर नहीं,
    तेरी सीरत पर किया करते है…”

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इश्क़. मोहब्बत. इबादत

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