किसी वृक्ष के टूटने पर

किसी वृक्ष के टूटने पर

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यह वैमनस्य की लकीरें,
किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित,
तुम्हारे पथ को करती अवरोधित !!

तुम स्वंयमेव क्यों,
उपचार नहीं करते,
अपनी चिंताओं का वैद्य बनते !!

किसी वृक्ष के टूटने पर,
पंक्षियों का रुदन न होता,
परिश्रम में वे अपनी कसर नहीं रखते !!…
~श्वेता पाण्डेय

Kisi Vraksh Ke Tootne Par

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Yeh Vemansye Ki Lakire,
Kisi Poorvagreh Se Grasit,
Tumhare Path Ko Karti Avrothit !!

Tum Swamev Kyon,
Upchaar Nahi Karte,
Apni Chintao Ka Veid Bante !!

Kisi Vriksh Ke Tootne Par,
Panchiyo Ka Rudan Na Hota,
Parishram Mein Ve Apni Kasar Nahi Rakhte !!
~Shweta Pandey

Shweta Pandey
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