Insaniyat Jaise Zameen Ke Andar So Gayi Hai – Hindi Shayari

इंसानियत जैसे ज़मीन के अंदर सो गई है

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जिंदा रहने के लिए भी, आज मरना जरूरी है,
कि ये दुनिया लाशो की शौक़ीन हो गई है !!
आँखें बंद कर के तमाशा देख रहा है इंसान,
इंसानियत जैसे ज़मीन के अंदर सो गई है !!
~विजय कुमार खेमका

Zinda Rehne Ke Liye Bhi, Aaj Marna Jaruri Hai,
Ki Ye Duniya Lasho Ki Shaukin Ho Gayi Hai !!
Aankhein Band Kar Ke Tamasha Dekh Raha Hai Insaan,
Insaniyat Jaise Zameen Ke Andar So Gayi Hai !!
~Vijay Kumar Khemka

VIJAY KUMAR KHEMKA
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1 Comment
  1. devansh raghav 5 वर्ष ago

    वाह अतुलनीय शब्द और पंक्तियाँ।…….

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